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बिहार की विरासत को जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम, पटना व बिहार संग्रहालय के बीच टनल निर्माण की शुरुआत; कई विकास योजनाओं का सीएम ने किया निरीक्षण

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पटना। बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को एक नई पहचान देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को लगभग 542 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली उस महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्यारंभ किया, जिसके तहत पटना संग्रहालय और बिहार संग्रहालय को आपस में एक विशेष टनल के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दोनों संग्रहालयों में प्रदर्शित ऐतिहासिक धरोहरों को देखने के लिए आने वाले पर्यटकों और शोधार्थियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में काफी सुविधा होगी।
सरकार की योजना है कि इस टनल के माध्यम से बिहार के अतीत, उसकी सभ्यता, ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को एक समेकित रूप में प्रस्तुत किया जा सके। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि बिहार की ऐतिहासिक पहचान और समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने बेहतर तरीके से प्रस्तुत करना सरकार की प्राथमिकता है। टनल के निर्माण से दोनों संग्रहालय एक साझा सांस्कृतिक परिसर के रूप में विकसित होंगे, जिससे पर्यटक बिहार के इतिहास को एक क्रमबद्ध तरीके से समझ सकेंगे।
टनल परियोजना के साथ ही मुख्यमंत्री ने बिहार संग्रहालय के सामने पुनर्विकसित किए जा रहे सरकारी आवासों और पार्क के निर्माण कार्य का भी जायजा लिया। अधिकारियों से विस्तृत जानकारी लेने के बाद उन्होंने निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्यों को तय समयसीमा के भीतर और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि राजधानी पटना का यह इलाका एक आधुनिक सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सके।
इससे पहले शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना जिले के बख्तियारपुर में कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का स्थल निरीक्षण किया। बख्तियारपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के पास निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण करते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया। इस ओवरब्रिज के तैयार होने से पटना-बख्तियारपुर पुराना मार्ग और नया फोर लेन मार्ग आपस में जुड़ जाएंगे, जिससे क्षेत्र के लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी और यात्रा का समय भी कम लगेगा।
इस परियोजना का लाभ शैक्षणिक संस्थानों को भी मिलेगा। ओवरब्रिज बनने के बाद बख्तियारपुर इंजीनियरिंग कॉलेज और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय को पुराने और नए दोनों मार्गों से सीधी संपर्कता मिल जाएगी। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को आने-जाने में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के दौरान गणेश उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बख्तियारपुर के नए भवन के निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भवन निर्माण का कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके और पठन-पाठन की व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
इसके अलावा स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय डुमर सिंह की प्रतिमा स्थल के पास बनाए जा रहे पार्क के निर्माण कार्य का भी मुख्यमंत्री ने जायजा लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थल न केवल ऐतिहासिक स्मृतियों को संजोने का कार्य करते हैं, बल्कि लोगों को प्रेरणा देने का भी माध्यम बनते हैं।
मुख्यमंत्री के निरीक्षण कार्यक्रम में गंगा नदी पर निर्माणाधीन बख्तियारपुर (करजान) से ताजपुर (समस्तीपुर) को जोड़ने वाले पुल का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा। इस पुल के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को इसे शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया। पुल के बन जाने के बाद उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क और मजबूत होगा, जिससे व्यापार, आवागमन और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार की इन परियोजनाओं को बिहार के बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के इस दौरे और निरीक्षण से यह स्पष्ट संकेत मिला कि सरकार विकास कार्यों को तेज गति से पूरा कर राज्य को नई दिशा देने की कोशिश में जुटी 

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